Posted by: jeetbhargava on: अप्रैल 10, 2010
Dear Readers,
Please visit My New Updated & Regular Blog:
www.secular-drama.blogspot.com
Obviously it is dedicated to psudo-seculars of India.
Regards,
Jeet Bhargava
Posted by: jeetbhargava on: जनवरी 15, 2009
दुख की बात है की हमारा मुख्यधारा का तथाकथित सेकुलर मीडिया पिछले कई साल से कांग्रेस और यु पी ऐ के घटक दलों का गुणगान कर रहा है. फ़िर भी इस सरकार द्वारा मीडिया पर तुगलगी क़ानून लादा जा रहा है. इसे लेकर मीडिया में काफी ऊहापोह की स्थिती है. छोटी-छोटी बात पर अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर हल्ला करने वाले भारतीय सेकुलर मीडिया के लिए अब स्थिती न उगलते बन रहा है न ही निगलते. कई साल तक कांग्रेस और सपा सहित कम्युनिस्टों की चापलूसी के बाद अब इन्ही को कटघरे में कैसे खडा किया जाए? टाईम्स ऑफ़ इंडिया से लेकर एन ड़ी टी वी इंडिया तक कुछ भी उठाकर देख लीजिये. हमारा ये मीडिया बड़ी बेशर्मी से इस सरकार के महिमामंडन में लगे हैं. इसकी अधिकाँश रिपोर्ट्स और समाचार आपको हमेशा एक-तरफा ही मिलेंगे. जब मीडिया की कमर ही न हो, सचाई न हो तो सरकार उसके गले में पट्टा बाँधने की जुर्रत करेगी ही, जनता भी उसे इज्ज़त नही देगी. सबसे पहले तथाकथित मुख्यधारा के मीडिया को अपनी छवि सुधारनी चाहिए, अपनी इमानदारी और निष्पक्षता साबित करनी चाहिए. फ़िर देखना मीडिया के हक में सिर्फ़ मीडिया ही नहीं, आम आदमी भी खडा हो जायेगा.
सत्यमेव जयते!
Posted by: jeetbhargava on: सितम्बर 24, 2008
Muslims who want to live under Islamic Sharia law were told on Wednesday to get out of Australia , as the government targeted radicals in a bid to head off potential terror attacks.
Separately, Howard angered some Australian Muslims on Wednesday by saying he supported spy agencies monitoring the nation’s mosques. Quote: ‘IMMIGRANTS, NOT AUSTRALIANS, MUST ADAPT. Take It Or Leave It. I am tired of this nation worrying about whether we are offending some individual or their culture. Since the terrorist attacks on Bali , we have experienced a surge in patriotism by the majority of Australians.’
‘This culture has been developed over two centuries of struggles, trials and victories by millions of men and women who have sought freedom’
‘We speak mainly ENGLISH, not Spanish, Lebanese, Arabic, Chinese, Japanese, Russian, or any other language. Therefore, if you wish to become part of our society . Learn the language!’
‘Most Australians believe in God. This is not some Christian, right wing, political push, but a fact, because Christian men and women, on Christian principles, founded this nation, and this is clearly documented. It is certainly appropriate to display it on the walls of our schools. If God offends you, then I suggest you consider another part of the world as your new home, because God is part of our culture.’
‘We will accept your beliefs, and will not question why. All we ask is that you accept ours, and live in harmony and peaceful enjoyment with us.’
‘This is OUR COUNTRY, OUR LAND, and OUR LIFESTYLE, and we will allow you every opportunity to enjoy all this. But once you are done complaining, whining, and griping about Our Flag, Our Pledge, Our Christian beliefs, or Our Way of Life, I highly encourage you take advantage of one other great Australian freedom, ‘THE RIGHT TO LEAVE’.’
‘If you aren’t happy here then LEAVE. We didn’t force you to come here. You asked to be here. So accept the country YOU accepted.’
Maybe if we circulate this amongst ourselves, Indian citizens will find the backbone to start speaking and voicing the same truths.
Posted by: jeetbhargava on: सितम्बर 22, 2008
हमारे तथाकथित सेकुलर नेताओ की तरह हमारा मीडिया भी बेशर्म है. इससे कुछ भी उम्मीद न करे. यह भी हमारे लालू, मुलायम, सोनिया, मनमोहन और शरद पवार जैसा ही पाखंडी और झूठा है. इनके लिए वोट और सत्ता ही सब कुछ है वैसे मीडिया के लिए टी आर पी और कोंग्रेस जनित नकली सेकुलरवाद ही सबकुछ है. मैं आपको इसके दोगलेपन के दो और उदाहरण देना चाहूंगा. समाजवादी पार्टी की आजमगढ़ इकाई के वाइस प्रेजिडेंट शादाब अहमद के आतंकवादी सुपुत्र मुहम्मद सैफ को हथियारों समेत दिल्ली पुलिस ने पकडा है. लेकिन न तो मीडिया ने देश को ख़बर दी न ही सिमी के रहनुमा मुलायम-अमर कुछ कहते नज़र आ रहे हैं. दूसरी बात उडीसा में स्वामी लक्ष्मनानद समेत पांच लोगो की ईसाई मिशनरियो ने ह्त्या कर दी लेकिन यहाँ ख़बर भी मीडिया ने दबा दी और उसके बाद हुए हिंसा को जोर शोर से प्रचारित किया.
Posted by: jeetbhargava on: अगस्त 18, 2008

बाबा अमरनाथ का सच, जिसे जनता के सामने लाने की हिम्मत और ईमानदारी हमारे तथाकथित मुख्यधारा के मीडिया ने नहीं दिखाई. कृपया पढ़ें, और पढाएं. हर भारतीय और भारत से प्रेम रखने वाले हर व्यक्ति को यह सच जानना आवश्यक है.
अब भी वक्त है जाग जाओ.
आज अगर खामोश रहे तो कल सन्नाटा छायेगा,
हर बस्ती में आग लगेगी,हर बस्ती जल जाएगा.
सन्नाटों के पीछे से तब एक सदा ये आयेगी.
कोई नही है,कोई नही है,कोई नही है कोई नही.
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The Land Of Kashmir
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The Amarnath Fact Sheet
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The Amarnath Fact Sheet
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The Land in Question
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The Land Controversy
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And Kashmiri Mulsims Protesting against Land Allocation
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The Double Standards….
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JOIN THE PROTEST of JAMMU AND CONDEMN JnK Govt.
Don’t sleep please forward it, J&K minorities (Hindus and Sikhs) need your help !!!
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Posted by: jeetbhargava on: अगस्त 6, 2008
लगता है हमारे तथाकथित सेकुलर टीवी और अंग्रेजी मीडिया ने हिन्दू संतों को बदनाम करने और एकतरफा रिपोर्टिंग करने की सुपारी ले ली है. इसका नवीनतम शिकार हैं संत आसाराम बापू. इसके पहले इसी मीडिया ने शंकराचार्य और योगी रामदेव को बदनाम करने तथा एकतरफा रिपोर्टिंग का महान सेकुलर कर्तव्य निभाया था. इस बात को लेकर तरस आता है कि ‘सच हर कीमत पर’, ‘ख़बर वही जो सच दिखाए’, ‘आपको रखे आगे’, ‘सबसे तेज’ जैसे झुमलों के साथ अपनी दुकानदारी चलाने वाले चैनल हिन्दू संतों के बारे में ‘कुछ भी, कैसा भी’ उगलने के लिए उतारू नज़र आते हैं. यह न कोई क्रोस चेकिंग न ही दूसरे पक्ष का बयान लेने की जहमत उठाते हैं. एक साधारण बुद्धि वाला व्यक्ति भी यहाँ सोच सकता है कि संत आसाराम बापू जैसा व्यक्ति मासूम बच्चों की जान लेकर क्यो बदनामी और पाप का भागी बनेगा? इसमे उनका कौनसा हित पूरा होगा? लेकिन हमारे ये बुद्धिजीवी पत्रकार और उनके सम्पादक तथ्यों की ईमानदार प्रस्तुती की बजाय उसे अपनी मनमाफिक कहानी में ढालकर परोसने लगते हैं. और अगर किसी हिन्दू संत के मामले में ख़बर हो तो वह निरंकुश होकर चरित्र -हनन अभियान में लग जाते हैं. क्योंकि उन्हें मालूम है इस काम में किसी लश्कर या दुबई से डॉन की धमकी का खतरा नहीं है. इससे उनके ख़िलाफ़ कोई फतवा या बहिष्कार का खतरा नहीं है. ऊपर से देश के तथाकथित बुद्धिजीवी और दिल्ली की मैम और सरकार भी राजी. और सोया हुआ हिन्दू समाज उनका कोई बिगाड़ नही सकता. इसी के चलते भारत भूमि में ही संत आहत हो रहे हैं. और शर्म की बात ये ही कि आहत कराने वाले लोग भी भारतीय हैं.
अफ्रिका के बाद एशिया को ईसाई बनाने का एलान करने वाले पोप के गुणगान और महिमा-मंडन में हमारा मीडिया आगे रहता है. कुछ वर्ष पहले बंगलुरु में एक ईसाई गुरू ने जादू के बल पर लोगों के इलाज करने का पाखण्ड-प्रदर्शन किया था. उस वक्त भी अंग्रेजी और टीवी मीडिया उसके महिमा मंडन में लगा गया था. यहाँ तक कि उस वक्त कर्णाटक के सेकुलर कोंग्रेसी मुख्यमंत्री धरमसिंह उस महाशय के सम्मान में गए थे.
लेकिन जब हिन्दू संतो की बात आती है तब हमारा सेकुलर मीडिया अजीब-सा नकारत्मक रुख अपनाता है. इन्हे संतो द्वारा किए गए जनहित काम नज़र नहीं आते, लेकिन नीजी हित साधने वाले व्यक्ति द्वारा लगाए गए आधारहीन आरोप ज़रूर नज़र आते हैं. हम सब ने देखा कि योगी रामदेव पर आरोप लगाने वाली कम्युनिस्ट सेकुलर नेता वृंदा करात ने सेकुलर नेताओं और मीडिया की काफी तारीफे बटोरी. हिन्दू संतो, नेताओं और संगठनो की बात आते ही ये सेकुलर मीडिया अपना विष-वमन शुरू कर देता है. जिस आसाराम बापू के कहने पर हजारो लोगो ने व्यसन छोड़ दिए हो, जीवन का सही रास्ता चुना हो , जो लाखो लोगो के लिए पूज्य हो उस संत के साथ मीडिया किसी अपराधी की तरह बर्ताव कर रहा है. दूसरी ओर आसारामजी के ख़िलाफ़ अहमदाबाद बंद और चरित्र- हनन के अभियान में लगे युवक कांग्रेस के एक नेता द्वारा रातो-रात खडा किया गया अज्ञात एनजीओ ‘जागेगा गुजरात’ भारत के सेकुलर मीडिया के लिए महत्वपूर्ण और ज्यादा विश्वसनीय हो गया? साथ ही आसारामजी के विरोध के पीछे गुजरात के कांग्रेसी नेताओं की सक्रियता को बेनकाब करने का साहस भी मीडिया के पास नही है. गौरतलब है कि गुजरात में अपना जनाधार खो चुकी कांग्रेस लगातार ऐसे हथकंडे अपना रही है. इसका एक नमूना पिछले चुनावों में शबनम हाशमी के सहमत और अनहद जैसे कई तथाकथित एनजीओ की भूमिका जगजाहिर है. जिनको कांग्रेस ने प्रायोजित किया था.
क्या उसे हिन्दू समाज विरोधी ताकतें संचालित कर रही हैं? क्या यह प्रवृत्ति से उसकी विश्वसनीयता ही सवालो के घेरे में नही है? क्या भारतीय मीडिया के लिए कोई आचार संहिता है? क्या इनको नियंत्रित करने के लिए कोई नियामक संस्था है? यदि है तो वहा क्यो खामोश है? माना कि सही तथ्यों को प्रस्तुत करना पत्रकारिता का धर्म है लेकिन तथ्यों के साथ खिलवाड़ करके उसे मनोरंजन का साधन बनाना और अपने पेशे में निष्पक्षता की बजाय अपनी विचारधारा के अनुसार खबरों को जामा पहनाना कहाँ तक सही है. भारत का तथाकथित सेकुलर मीडिया धर्मान्धता और अंधविश्वासों का विरोध करते हुए भारतीय धर्म और संस्कृति पर ही हमले करने लगा है. उसकी ऐसी हरकतों से टीआरपी बढ़ सकती है लेकिन भारत का भरोसा नहीं.
भारतीय टीवी मीडिया एक मदमस्त हाथी की तरह हो गया है. एक विशेष तरह की विचारधारा से पोषित और निरंकुश व मर्यादाहीन. जो मीडिया खुद को सच का साथ देने वाला, निष्पक्ष बताता है, आज वही सच को तोड़ने-मरोड़ने और पक्षपात तरीके से काम कर रहा है. अब कौन उसे आइना दिखाए, कौन उसे कटघरे में खडा करे? अपने -आप को सर्वशक्तिमान मानने वाला हमारा सेकुलर मीडिया खुद दूषित लंका पर बैठा हुआ है लेकिन हम मान बैठे हैं कि ये मीडिया है और ‘मीडिया को नहीं दोष गुसाईं’.
Posted by: jeetbhargava on: अगस्त 1, 2008
ख़बर किस कीमत पर ?? (31.07.2008)
भारतीय मीडिया में एक बड़ा नाम है (था) राजदीप सरदेसाई का. कई चैनलों से होते हुए यहाँ महाशय फिलहाल आईबीएन नामक अमेरिकी चैनल के भारत में मुखिया हैं. इन्होने गुजरात दंगो के बारे में (गोधरा के बारे में नहीं) बिना किसी सेंसरशिप और क्रोस चेकिंग के अनाप-शनाप रिपोर्टिंग की थी. और नरेन्द्र मोदी को कोसने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी थी . इसी तरह सांसदों के प्रश्न के बदले रिश्वत काण्ड को कई दिनों तक दिखाकर अपने अपने आप को धाँसू पत्रकार साबित करने में लगे हुए थे.
लेकिन हाल ही में हुए नोट के बदले वोट कांड में इस पत्रकार महोदय को सौंप सूंघ गया है. सारी दुनिया जानती है कि कोंग्रेस और समाजवादी पार्टी ने किस तरह सांसद खरीदकर सरकार बचाई. इस प्रकरण की टेप राजदीप के ही पत्रकार साथी ने तैयार करके उन्हें सौंपी है लेकिन अब यहाँ धाँसू पत्रकार उन टेप्स को नहीं दिखाने के लिए बहाने कर रहा है. बहाने ऐसे कि, किसी भी समझदार व्यक्ति के गले नहीं उतर सकते.
अपनी सोनिया मैम और अमरसिंह के हितों की हर कीमत पर रक्षा करने वाले सेकुलर पत्रकार राजदीप भले ही टेप नही दिखाए लेकिन दुनिया ने भारत की तथाकथित सेकुलर पत्रकारिता का घिनौना चेहरा तो देख ही लिया है.
Posted by: jeetbhargava on: जुलाई 31, 2008
देश पर चोट सही, वोट पर चोट नहीं!! (31/07/2008)
जयपुर ब्लास्ट के आरोपी मौलाना मतीन को पकड़ने के लिए वाराणसी गयी पुलिस का हजारो मुस्लिमों ने हिंसक विरोध किया.
बम विस्फोटों को लेकर घडियाली आंसू बहाने वाले हमारे सेकुलर नेता और मीडिया.हमेशा की तरह खामोश है. गौरतलब है की यूपी में मायावती और दिल्ली में सोनिया (मनमोहन) सरकार भी मौन बैठी सब देख रही है. आखिर ये दोनों ही महान सेकुलर पार्टियों के महान नेता जो हैं.. भाई मुस्लिम वोट चाहिए तो ये सब झेलना ही पडेगा ना! जेहादी आतंकवादी मासूम जनता को अपना शिकार बनाए तो क्या फर्क पङता है?
Posted by: jeetbhargava on: मई 25, 2008
जिन्होंने ‘जननी जन्मभूमी को स्वर्ग से भी प्यारा’ बताया ऐसे राष्ट्रनायक श्री राम की जन्मभूमी पर राज करनेवाली हमारे देश की सेकुलर सरकार और नेहरू व नेहरुवाद की छत्र-छाया में पोषित वामपंथी इतिहासकार तथ्यों की अनदेखी करते हुए उन्हें झुठलाने के अभियान में जी-जान से लगे हुए हैं. लेकिन श्रीलंका की सरकार ने गहरा शोध अनुसंधान करके रावण और राम के एतिहासिक आस्तित्व के बारे में सच को सबके सामने रखते हुए भारत की सेकुलर जमात के गाल पर करारा तमाचा मारा है. शर्म की बात है की रावण के देश ने भी श्रीराम के वजूद को माना ही बल्कि उसे साबित करके स्वयं को गौरवान्वित महसूस किया है, जबकि भारत के सेकुलर सरकार ने श्रीराम को अभी भी निर्वासित ही हर रखा है. हम तो यही कहेंगे की, प्रभू राम भारत के सेकुलरों को सदबुद्धि दे. … Read the rest of this entry »
Posted by: jeetbhargava on: मई 22, 2008
देशद्रोही घुसपैठिये इनके अतिथि हैं?
“भारत देश में अतिथियों के स्वागत सत्कार की महान परम्परा है. इसलिए हम बांग्लादेशियों को देश के बाहर नहीं निकाल सकते.”
-शीला दीक्षित, दिल्ली की कोंग्रेसी मुख्यमंत्री ने जयपुर विस्फोट में ७० लोगों की हत्या में बांग्लादेशियों के नाम आने पर उनके बचाव में यह कहा.
सच: शीलाजी को देश के मासूम लोगों के खून से इन बांग्लादेशी अतिथियों का सत्कार करते हुए सत्ता हासिल करनी है. आख़िर वोट बैंक का सवाल है भाई. ये है भारतीय राजनीति की एक महान सेकुलर नेता.